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YASG – Yet Another Story Game

After the huge success of our first Story, we played the same game again, over the night of  Friday 26 June, with a different mix of authors this time – producing a more weird unreadable piece of trash. The useless morons who collaborated to bring this story together were:

  1. Anil Kumar Gupta
  2. Mota Bhai (Abhinav Yadav)
  3. Siyaar a.k.a. CR (Anuj Kumar Jaglan)
  4. Lambu (Atul Singh)
  5. Mamma (Anurag Singh)
  6. Bhangi (Aakash Seth)
  7. n main sala Mohit — who slept halfway.

Here’s the story for you, the story is though incomplete, hence we hae decided to continue this game on this blog itself.

The story begins….

काले बादल छाये हुए थे | और रोमन साम्राज्य अपने पूरे चरम पे था ! कोलोसियम (Colosseum) में हजारों लोग हर्षोल्लास से चिंघाड़ रहे थे |

पिछले तीन साल से उन्होनें बादलों को देखा नहीं था तभी एक बड़ी बूँद गिरी टप्प ! वो नीले रंग की थी उसनें नीले रंग का सलवार कमीज पहना हुआ था | हाँ ये दुर्योधन की बेटी थी जिसका नाम बूँद था | आज यहाँ हजारों लोग उसे गिरता देखने आये थे | नैतिक रूप से ये सही नहीं हो रहा था | तभी टप्प टपा टप्प  की आवाजों से माहौल गूँज गया | इतने में सुसन फ्लेत्चेर (Susan Fletcher) को इलेक्ट्रॉनिक मेल (Email) की बीप (beep) आ गयी | चाणक्य जो उसे नीति बता रहे थे इलेक्ट्रॉनिक मेल आने के कारण उसमें बाधा आ गयी | ये टप्प टप्पा टप्प की आवाजें घोडे  के टापों   की थी | जिसपे बैठ कर नौगढ़ का राजकुमार बूँद  को लेने आय था  |

तभी उसके ऑफिस से फ़ोन आया की जल्दी से वापस आओ क्लाइंट-काल (Client Call)  है | इतनें में बारिश भी आ गयी, और फिर ओले पड़ने लगे | बूँद को देखते ही वो खडा हो गया |

इतनी कहानी पे फ्लेत्चेर ने टीवी बंद कर दिया और  चाणक्य से कहा की गाडी निकालो हम सीधा रोमन साम्राज्य जाकर ये दृश्य साक्षात देखेंगे लाइव टेलेकास्ट (Live Telecast) नहीं |  क्योंकि मौसम ख़राब होने की वजह से लाइव टेलेकास्ट ठीक से नहीं हो प् रहा था | अंततोगत्वा सभी रोमन साम्राज्य की तरफ अग्रसर हुए | उधर रोम में केसर (Caeser)  इन सबही बातों से बेखबर अपने २५ इंच टेलिविज़न (25″ TV) पे  हिंदी फिल्म “अँधेरी रात मैं दिया तेरे हाथ मैं” देख रहा था | कोबायाशी भी बूँद की स्यवमवर में पहुँच चूका था | तभी मंजीत की माँ ने उसे जगाते हुए बोला की क्या स्कूल नहीं जाना है ?

मंजीत ने कहा, “नहीं आज स्कूल बंद है ,क्योंकि सभी लोग बूँद की स्यवमवर में गये हुए हैं” | बूँद अपनी इंडेक्स फिंगर की नाखून से अपनी नाक खोद रही थी, तभी ऊँगली में मोंच आ गयी | उसकी माँ ने फ़ोन करके डॉक्टर को बुलवाया |

डॉक्टर  ने कहा “Madness is like gravity all it needs a little push ” | तभी मास्टर दीना नाथ चौहान नें मंजीत का सपना तोड़ते हुए उससे कहा की तुम बूँद का स्यवमवर कभी नहीं जीत सकते व तो नौगढ़ के राजकुमार  के साथ ही जायेगी | एक तरफ दीना नाथ चौहान की बातें और दूसरी और बूँद की ऊँगली का दर्द, लेकिन किसे क्या पता नौगढ़ का राजकुमार तो विजयगढ़ की रानी से प्यार करता था जो अपने दरबार के एक मंत्री के साथ काम क्रीडा में लिप्त रहती ठी और उसका वक्ष स्थल लिपापुता रहता था | यह आर्नोल्ड  की उस मूर्ती की बात कर रहे थे जिसे मकबूल फ़िदा हुसैन ने रंग था | वह मूर्ती जो कोलोसियम के बीच में स्थापित थी, उसी के चारों और लोग बैठे हुए थे जो बूँद के स्यवमवर में आये थे | अर्नाल्ड के हाँथ का डम्बल का राईट लट्टू टूट गया था जो किसी के सर पैर जाके लगा और उस स्यवमवर में हाहाकार मंच गया ! केसर की पत्नी अर्धनग्न अवस्था में बैठी हुई थी |

वाह क्या चित्र कह के स्यवमवर की शुरुआत हुई | पाँचों पांडव अतोरी हंसो की बनायीं ही समुराई ( कटाना )  लेआये हुए थे | बूँद के बाप केसर नें ऐलान किया की, “जो अर्नाल्ड के डम्बल का टूटा हुआ लट्टू १५०० रपम (1500rpm) की स्पीड से घुमाएगा वो बूँद को पायेगा” | बूँद ये सब कुछ देखकर कुछ सोच रही थी | उसनें अपने प्रेमी गोलम (Gollum) को याद किया और कहा की किसी को एक पैसा भी दहेज़ नहीं दिया जाएगा | यह सुनकर द्रौपदी ने तुरत पांडवों को घर चलने को कहा क्योंकि उसे दिख गया की पांडवों की औकात नहीं है की १५०० रपम पे लट्टू घुमा सकें | तभी मास्टर दीनानाथ चौहान का शिष्य मंजीत आ धमका |

सुसन फ्लेत्चेर ने चाणक्य को शादी में मंत्र पढने के लिए राजी कर लिया था | चाणक्य नें मंत्रों के साथ रोम को कब्जाने की भी  नीति बना ली थी | चन्द्रगुप्त नें जय और वीरू को ऐसा होने से रोकने के लिए कहा |क्योंकि उसे पता था की रोम को कब्जा करने वाले शक्स को आजीवन कब्ज का श्राप मिल जाता है | तभी एक डॉक्टर नें एक ट्रक लोमोफाने (Lomofane) का मंगाया कब्ज दूर करने के लिए | वहीँ दूसरी और नौगढ़ का राजकुमार इस बात से टेंशन में था की अगर क्लाइंट से बात सही नहीं ओ पायी तो Salary में ४० % की कटौती हो जायेगी |  और शायद ये बात बूँद को नागवार गुजरे और वह चल बसे |

केसर की पत्नी कुछ अद्भुत कर रही थी | जय और वीरू उसके आइटम नंबर के लिए तैयार हो रहे थे | वहीँ ठाकुर और मिस्टर अमेरिका लट्टू को उठाने की कोशिश कर रहे थे | उधर नौगढ़ की क्लाइंट काल ख़तम हो गयी थी और वो कोलोसियम में घुसने ही वाला था की उसकी माँ की रसोईघर से तरह तरह के पकवानों की खुशबू आने लगी, जो बहुत ही आकर्षक थी |

मंजीत कोबायाशी के साथ उसका काम कर रहा था | विषम परिस्थितियों के बाद भी ठाकुर ने मिस्टर अमेरिका की मदद से लट्टू घुमाना शुरू किया | और लट्टू को घूमता देख पूरी भीड़ को नींद आ गयी और वो खर्राटे लेने लगे | सम्राट ने पूरे साम्राज्य को एक सप्ताह तक सोने का आदेश दिया और स्यवमवर cancel हो गया |

इस बार भी बूँद को निराशा ही हाँथ लगी | बूँद हताश मन से सभा से निकली और खुदकुशी करने के विचार से पहाडियों की तरफ रुख किया | जहां से जय वीरू, केसर की पत्नी  के साथ कूदे थे | लेकिन गरीब रथ के आने का समय होने के कारण रेलवे फाटक बंद था और बांकेलाल दूसरी तरफ प्रतीक्षा कर रहा था |  बूँद पहाड़ से कूदने ही वाली थी की उसके कान में किसी की ध्वनि पड़ी | वो आवाज नौगढ़ के राजकुमार की थी जो चिल्लाता हुआ उसे बचने आ रहा था लेकिन स्पीड ज्यादा होने के कारण बूँद को लेके पहाड़ से नीचे गिर गया | तभी मंजीत आया और उसनें दोनों का हाँथ पकड़ के खींच लिया |

नौगढ़ का राजकुमार और बूँद चोटिल हो गए थे | बांकेलाल ने बूँद के प्यार में नौगढ़ के राजकुमार को पहाड़ की चोटी से दुलत्ती दी | उसके बाद बांकेलाल ने तेरी – फूं – की – फूं ( telephone  ) पर डॉक्टर से संपर्क साधा और उन्हें लोगों  की हालत से अवगत कराया | डॉक्टर ने तभी ट्रक से साड़ी लlomofane निकाल कर सारे लोगों में बाँट दी | उधर मंजीत ने बूँद को अपने सीने से चिपका लिया | बूँद को DDLJ पिक्चर का शाहरुख़ और काजोल का वो सीन याद आया जिसमें वे ठण्ड में एक अस्तबल  में फंस जाते हैं |

बांकेलाल ने पीछे से आके मंजीत की हत्या कर दी | लेकिन हाय रे बांकेलाल की फूटी किस्मत मंजीत और नौगढ़ का राजकुमार दोनों ही सकुशल वापस लौट आये | यह देख बांकेलाल ने सोचा की – क्यों न राजा विक्रम सिंह की मदद लेकर मंजीत और नौगढ़ के राजकुमार को जेल में बंद करवा दिया जाए | इस षडयंत्र की खबर मंजीत के कानों तक पहुँच गयी  और उसनें नौगढ़ के राजकुमार के साथ मिलकर बांकेलाल की हत्या कर दी |

केसर अपनी पत्नी को ढूंढते हुए पहाडी  पे पहुँच चूका था | पत्नी की दशा जान कर उसनें नौगढ़ के राजकुमार को मार डाला | उधर ठाकुर ने १५०० रपम पे लट्टू घुमा कर मिस्टर अमेरिका पे दे मारा और ये सब देख कर मरने का नाटक कर रहे बांकेलाल की आँखें भर आई | पूरी सभा ताली की गडगडाहट से गूँज उठी और सब बूँद को खोजने लगे और इंतज़ार करने लगे की कब ठाकुर के गले में वरमाला पड़ेगी  | पर ये क्या, वरमाला डालने से पहले ही मंजीत ने ठाकुर की गर्दन काट दी | तभी बूँद चिल्लाते हुए सभा में प्रवेश की और रोने लगी | गोलम भी अपने प्यार को पाने के लिए खडा ह चूका था | Client Eastwood द्वारा निर्देशित इस चलचित्र का मधय्न्तर हो चूका था और जूरी (jury) ने इसे बहुत सराहा और सभी लोग हाल के बहार खाना खाने चल दिए…..

The story has to continue.. and due to geographical constraints but blessed with the technological advancements, we’ll continue it here… using comments!


So go on, complete the story. It is open now not just for the initial collaborators but for all others who wish to add their bit to spin the yarn… nJoy!